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सूक्ष्म श्वास नलियों में कोई रोग उत्पन्न हो जाने के कारण जब किसी व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी होने लगती है तब यह स्थिति दमा रोग कहलाती है, इस रोग में व्यक्ति को खांसी की समस्या भी होती है।




Symptoms


  • • साँसों की घरघराहट, खाँसना

  • • सांस लेने में तकलीफ होना

  • • छाती में कफ भर जाना

  • • किसी काम को करते हुए बहुत ज़्यादा थकान का अनुभव होना

  • • बार बार सर्दी ज़ुकाम लगना

  • • सोते समय तकलीफ का अनुभव।

  • • यह रोग स्त्री-पुरुष दोनों को हो सकता है।

  • • सांस लेते समय अधिक जोर लगाने पर रोगी का चेहरा लाल हो जाता है।

Causes

अस्थमा कई कारणों से होता है कई बार यह जेनेटिक तो कई बार आनुवांशिक भी हो सकता है। कई अन्य कारण निम्न हैं:


  • • पर्यावरण में बदलाव, तनाव, चिंता क्रोध

  • • अधिक भय के कारण,फेफड़ों का संक्रमण

  • • आनुवांशिक दोष (genetic problems)

  • • समय से पहले जन्म

  • • कुछ खास भोजनों से, जैसे अंडे, मछली, मूंगफली, सोया आदि।

  • • अतिरिक्त व्यायाम, सीने में जलन,

  • • धूम्रपान और तम्बाकू ,नशीले पदार्थों का अधिक सेवन करना

  • • मनुष्य की श्वास नलिका में धूल तथा ठंड लग जाने के कारण

  • • औषधियों का अधिक प्रयोग करने के कारण कफ़ सूख जाने से

  • • भूख से अधिक भोजन खाने से

  • • मिर्च-मसाले, तले-भुने खाद्य पदार्थों तथा गरिष्ठ भोजन करने से

  • • मल-मूत्र के वेग को बार-बार रोकने से

  • • (एस्पिरीन और बेटा- ब्लॉकर्स) के सेवन

  • • चीखने-चिल्लाने या फिर जोरदार तरीके से हंसना

  • • पेपर की डस्ट, रसोई का धुआं, नमी, सीलन, मौसम परिवर्तन

  • • फास्टफूड्स, पालतू जानवर के संपर्क में रहना और पेड़-पौधों और फूलों के परागकणों से



Precautions


  • • एलर्जी रहित तकियों और बिस्तरों का प्रयोग करें

  • • सोने के कमरे में पालतू जानवरों को ना आने दें

  • • धूम्रपान नहीं करना चाहिए।

  • • सोने के कमरे से पुराने कपड़े और खिलौने हटा लें

  • • भोजन में मिर्च-मसालेदार चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

  • • धूल तथा धुंए भरे वातावरण से बचना चाहिए।

  • • मानसिक परेशानी, तनाव, क्रोध तथा लड़ाई-झगडों से बचना चाहिए।

  • • शराब, तम्बाकू तथा अन्य नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए

Home Remedies for Asthama


  • • लहसुन - लहसुन दमा के इलाज में काफी कारगर साबित होता है। 30 मिली दूध में लहसुन की पांच कलियां उबालें और इस मिश्रण का हर रोज सेवन करने से दमे में शुरुआती अवस्था में काफी फायदा मिलता है।

  • • अदरक - अदरक की गरम चाय में लहसुन की दो पिसी कलियां मिलाकर पीने से भी अस्थमा नियंत्रित रहता है। सबेरे और शाम इस चाय का सेवन करने से मरीज को फायदा होता है।अदरक का एक चम्मच ताजा रस, एक कप मैथी के काढ़े और स्वादानुसार शहद इस मिश्रण में मिलाएं। दमे के मरीजों के लिए यह मिश्रण लाजवाब साबित होता है।

  • अजवाइन - दमा रोगी पानी में अजवाइन मिलाकर इसे उबालें और पानी से उठती भाप लें, यह घरेलू उपाय काफी फायदेमंद होता है।

  • लौंग - 4-5 लौंग लें और 125 मिली पानी में 5 मिनट तक उबालें। इस मिश्रण को छानकर इसमें एक चम्मच शुद्ध शहद मिलाएँ और गरम-गरम पी लें। हर रोज दो से तीन बार यह काढ़ा बनाकर पीने से मरीज को निश्चित रूप से लाभ होता है।

  • सहजन की पत्तियां - 180 मिमी पानी में मुट्ठीभर सहजन की पत्तियां मिलाकर करीब 5 मिनट तक उबालें। मिश्रण को ठंडा होने दें, उसमें चुटकीभर नमक, कालीमिर्च और नीबू रस भी मिलाया जा सकता है। इस सूप का नियमित रूप से इस्तेमाल दमा उपचार में कारगर माना गया है।

  • मैथी - मैथी का काढ़ा तैयार करने के लिए एक चम्मच मैथीदाना और एक कप पानी उबालें। हर रोज सबेरे-शाम इस मिश्रण का सेवन करने से निश्चित लाभ मिलता है।

  • ताजा फलों का रस- अपने शरीर की प्रणाली को पोषक तत्त्व प्रदान करने के लिए और हानिकारक तत्त्व बाहर निकालने के लिए रोगी को कुछ दिन तक ताज़े फलों का रस ही लेना चाहिए और कुछ नहीं।

  • कॉफ़ी (Coffee)- सामान्य कॉफ़ी में मौजूद कैफीन (caffeine) अस्थमा के दौरों पर नियंत्रण रखने

  • नींबू - विटामिन सी की कमी की वजह से भी दमा हो सकता है, अतः विटामिन सी युक्त फलों और सब्ज़ियों का सेवन करें। नींबू, संतरे, जामुन, रास्पबेरी, स्ट्रॉबेरी एवं पपाया विटामिन सी के काफी अच्छे स्त्रोत हैं। सब्ज़ियों में फूलगोभी एवं पत्ता गोभी से आपको भरपूर मात्रा में विटामिन सी मिलता है।

  • मछली का तेल - (Fish oil)-मछली के तेल में मौजूद ओमेगा 3 फैटी एसिड दमे के लक्षणों से निपटकर आपके फेफड़ों की रक्षा करते हैं। आप ओमेगा 3 फैटी एसिड दलिये से भी प्राप्त कर सकते हैं।

  • अंजीर - अंजीर साँसों से सम्बंधित किसी भी समस्या के उपचार के लिए काफी उत्तम है। 3 से 4 अंजीर रात भर भिगोकर रखें। अगले दिन खाली पेट में इन अंजीरों को खाकर पानी पियें। इस नुस्खे से आपके खून में पोषक तत्वों की मात्रा जाएगी एवं दमे के लक्षणों से आपको मुक्ति मिलेगी।

  • शहद (Honey)- शहद दमे की समस्या को दूर करने का काफी प्राचीन उपचार माना जाता है। शहद खुद में मौजूद अल्कोहल (alcohol) तथा बेहतरीन तेलों के माध्यम से अस्थमा के लक्षण कम करने में आपकी काफी मदद करता है।

  • सरसों का तेल - इस समस्या को दूर करने के लिए सरसों के तेल से मालिश करें। इससे साँसों की समस्या दूर होगी। 3 चम्मच सरसों का तेल लें और उसमें कपूर मिलाकर गर्म करें। अब इसे हल्का ठंडा होने दें और छाती और पीठ के ऊपरी हिस्से में मालिश करें। इस प्रक्रिया को तब तक दोहराएं जब तक आपको साँसों की समस्या से आराम ना मिल जाए।

खान-पान सलाह


  • 1. रोगी को ज्वर के आरम्भ में ठोस पदार्थ खाने के लिए नहीं देना चाहिए | उसे तरल अथवा फल खिलाने चाहिए | तली हुई, मसालेदार तथा मैदे की चीजें देना हानिकारक होता है | ठोस भोजन के स्थान पर मूंग की दाल का पानी नमक और काली मिर्च मिलाकर देने से लाभ होता है |

  • 2. साबूदाना दूध में बनाकर देने से रोगी की शक्ति बनी रहती है |

  • 3. थोड़ी सूजी तवे पर भूनकर दूध की पतली सी खीर बनाकर भी दे सकते हैं |

  • 4. फिटकरी (Alum)- थोडी सी फ़िटकरी तवे पर भूनकर चूर्ण बना लें। आधा चम्मच पाउडर बुखार आने के 3 घंटे पहले पानी से पीएं। बाद में हर दूसरे घंटे पर यह दवा लेते रहने से बुखार खत्म होता है।

  • 5. तुलसी पत्ता (Basil leaves)- जब बुखार न हो, 10 ग्राम तुलसी के पत्तों के रस में आधा चम्मच काली मिर्च का पाउडर मिलाकर चाट लें। इससे मलेरिया बुखार खत्म हो जाता है।

  • 6. भोजन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में दें-भूख से कुछ कम खाना खाना ही ठीक रहता है |

  • 7. बुखार अथवा किसी भी अन्य रोग के बाद खूब छक कर खाना ठीक नहीं है |

  • 8. मिठाइयां, चाट-पकौड़ी और मसालेदार पदार्थ खाना हानिकारक है |

  • 9. पेट साफ रखने का प्रयत्न करना चाहिए | 8-10 मुनक्के, एक-दो अंजीर अच्छी तरह धोकर सायंकाल के समय पानी में भिगो दें, प्रातः उठकर मुनक्का आदि को मसल-छानकर खाने और पानी पीने से पेट साफ रहता है |

  • 10. एक-दो छुहारे दूध में डालकर उबालें, पीने लायक होने पर छुहारे का दूध पी लें | इससे कमजोरी दूर होती है | ज्वर की अवस्था में अथवा उसके बाद रोगी को हवा और पानी से बचाना चाहिए |

  • रोगी का शरीर स्पंज से साफ कर देना चाहिए या गरम पानी में तौलिया भिगोकर निचोड़ लें, उससे रोगी का शरीर भली प्रकार साफ कर दें | साफ धुले हुए हल्के वस्त्र पहनाएं |

  • Note:- यदि मलेरिया बुखार में शरीर का तापमान बहुत जल्दी –जल्दी बढ़ या घट रहा है और ऐसा लगातार हो रहा है, तो आपको दोबारा से रक्त जांच करवानी चाहिए। मलेरिया में तबियत बिगड़ने पर अपनी आप अपनी मर्जी से किसी भी प्रकार की दर्द निवारक दवाईयों को न लें। ध्यान रहे जब आप दोबारा या जितनी बार भी रक्त जांच करवा रहे हैं, तो मलेरिया की क्लोंरोक्वीनिन दवाई ना लें।